सरोजनीनगर तहसील प्रशासन ने 26 अक्टूबर को गहरू गांव में भारत सरकार के संस्थान एनबीआरआई की ज़मीन पर चल रही अवैध प्लॉटिंग जेसीबी से ध्वस्त की। करीब 1.5 हेक्टेयर ज़मीन खाली कराकर एनबीआरआई को कब्ज़ा दिलाया गया; बची करीब 3 हेक्टेयर पर अगले दिनों में कार्रवाई होगी।
मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में 26 अक्टूबर को हुई समीक्षा बैठक में तय हुआ कि रजिस्ट्री का डेटा एपीआई से सीधे संबंधित विभागों तक पहुंचे, ताकि नामांतरण अपने आप हो सके। इसके लिए पायलट संस्थाएं चुनी जा रही हैं; आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से लखनऊ विकास प्राधिकरण चुना गया है। यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है।
सीतापुर रोड पर प्लॉट दिलाने का वादा कर सात लोगों से ₹30.61 लाख लेने के आरोप में अलीगंज पुलिस ने एक हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के नौ लोगों पर कोर्ट के आदेश से मुकदमा दर्ज किया है। पीड़ितों ने 2022 से पैसा कंपनी के खाते में भेजा था, पर न ज़मीन मिली न रकम लौटी।
लखनऊ नगर निगम ने गृहकर नामांतरण (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया सख्त कर दी है। अब गैर-पंजीकृत बंटवारा पत्र, दानपत्र, अनुबंध या किरायानामा, या सिर्फ शपथपत्र के आधार पर नामांतरण नहीं होगा। दस्तावेज़ों पर स्टांप शुल्क पूरा जमा है या नहीं, इसकी जांच होगी, एक साल पुराने पंजीकृत दस्तावेज़ भी जांच के दायरे में होंगे। कमी मिलने पर नामांतरण रुक जाएगा।
गोमती नगर के विरामखंड के एक प्लॉट को फर्जी वारिस प्रमाण पत्र के सहारे अपने नाम कराकर किसी और को बेचने के मामले में गोमती नगर पुलिस ने 21 अक्टूबर को दूसरे आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोप है कि प्लॉट मालिक की पत्नी और दिवंगत पति, दोनों को मृत दिखाकर प्रमाण पत्र बनवाया गया। पहला आरोपी 7 अक्टूबर को जेल भेजा गया था।
लखनऊ में कारोबार और प्लॉट के नाम पर पांच लोगों से ₹79.97 लाख ठगने के मामले चिनहट, विभूतिखंड और पारा थानों में दर्ज हुए। चार मामले प्लॉट के हैं — तीन में पूरा पैसा लेकर रजिस्ट्री नहीं कराई गई, एक में 2003 में बुक प्लॉट पर किसी और ने कब्जा कर लिया।
दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम का दावा है कि यूपी के विकास प्राधिकरणों में सील खुलवाने, सीलिंग से बचाने और नक्शे से ज्यादा निर्माण के लिए तय दरों पर रिश्वत ली जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार अब यह पैसा एजेंटों के ज़रिए लिया जाता है। विजिलेंस ने सालभर में 5 प्राधिकरणों के 11 अफसरों को रिश्वत लेते पकड़ा है।